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  बदनाम/ट्रोल हुई लघुकथाएं सम्पादकीय   प्रकाशन के क्षेत्र में लेखकों को धंधेबाजों से बचाने के लिए *हर्ष पब्लिकेशन्स* की स्थापना की गई है। इसे विशुद्ध रूप से साहित्यिक प्रकाशन संस्थान बनाने का हमारा प्रयास रहा। इसमें किसी का कोई भी व्यावसायिक हित नहीं है। प्रकाशन का यह मानना है कि साहित्यकारों को प्रगतिशील होना ही चाहिए। ऐसे में प्रकाशन की पहली पुस्तक का नाम सोशल मीडिया की बदनाम लघुकथाएँ रखने का प्रस्ताव पारित हुआ। इस संग्रह में ऐसे लघुकथाकार जो बहुत ज्यादह ट्रोल होते हैं उनकी ट्रोल की गई लघुकथा को स्थान देने की घोषणा की गयी थी। निश्चित ही ट्रोल होने के कारण रचनाकार का आत्मविश्वास डगमगाने लगता है ,  और वह लेखन के काई बार किनारा करने का विचार भी बना लेता है जबकि वास्तव में उनकी वे ही लघुकथाएँ मारक और उद्वेलित कर पाने में समर्थ होती हैं। उम्मीद थी कि इस यज्ञ में अनेक आहुतियाँ आएँगी लेकिन आशा के विपरीत बहुत कम रचनाकारों ने साहस दिखाया, असल में वे ही निर्भीक रचनाकार भी हैं। रचनाकारों की रचनाएँ बिना किसी संशोधन के यहाँ प्रकाशित की जा रही हैं। यह भी विदित हो कि रचनाकारों के विषय...